Friday, December 26, 2008
तुम सब पर लिखते हो मुझ पर कब कुछ लिखोगेमैंने कहा उस दिन लिखूंगाजिस दिन शब्द ख़ुद कतार बनकर मेरे पास आयेंगेखुबसूरत तू सबसे ज्यादा ये खुबसूरत शब्द को बतलायेंगेबादल चाँद सितारे ये हो गए सारे पुरानेऔर गीतों में कहाँ ताकत जो गाये तुझपे तराने इसीलिए मैं लिखता नही कोई कवितान ग़ज़ल गुन्गुनानी आती हैंपता नही उस बहते पानी में किसकी तस्वीर अचानक ही बन जाती हैंऔर क्यों वो उड़ते पंछी तेरी बात सुनते सुनते रुक जाते हैंलौटना होता हैं वक्त पे घर और ख़ुद वक्त से पहले ठहर जाते हैंवो कहती मुझ पर कुछ लिखते क्यों नहीकलम बेचारी चलती ही नहीये कमबख्त आगे बढती ही नही वजह सिर्फ़ इतनी इस कलम की नज़र भी तुझसे हटती नही उंगलिया ये कलम उठाये कैसे इनकी कपकपाती कशिश तेरी आंखों की कशिश के आगे बढती ही नही
Friday, December 19, 2008
trying to forget
कितनी तकलीफ से उसने मुझे भुलाया होगामेरी यादो ने तब उसे भी रुलाया होगाबात बेबात जब आँख उसकी छलकी होगीतब चेहरा उसने अपना बाजुओ में छुपाया होगासोचा होगा दिन में कई बार मुझको पर जान कर मुझको बताया होगा कही जो शहर भर में जिक्र मेरा सुना होगाअपनी मम्मी को उसने ज़रुर बताया होगा रात को शायद नींद न आई होगी तुझेतुने फिर तकिये को अपने सीने से लगाया होगामेरी यादो से होकर निढाल मेर यादों सेमेरी तस्वीर पे अपना सर जरुर टिकाया होगापूछा होगा जब किसी ने तेरे हालत का सबब तब बातो बातो में तुने सबसे छूपाया होगा .............ruth kar hamse kabhi jab chale jaoge tum ye na socha tha kabhi itna yaad aaoge tummmmmm
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